Tuesday, May 20, 2008

कल रात शरहद पर कुछ गोलियां चली थीं

भोपाल
आज सवेरे जगा ही था कि अखबार वाला पेपर देकर चला गया, एक नजर डालकर सिराहने साइडमें रख कर सो गया फ़िर झपकी लगी ही थी कि एक ख़याल आया और में जग गया उसी पेपर को उठाया और तल्लीनता से पढने लगा आख़िर उस पेपर के पहले पेज पर समाचार ही कुछ ऐसे थे स्टीमर में स्टोरी लगा रखी थी अब कुंवारे सैनिकों कि शादी कराएगी वायुसेना । भाई क्या चोखी ख़बर थी मन राजी हो गया कि चलो अब कोई कुंवारा ये जिद तो नहीं करेगा जेसे भी हो मेरा चक्कर चलवाओ मेरी शादी करवाओ ......... ।
इस काम को करने के लिए एक वेबसाइट भी बनवाई गई है ये और भी अच्छी बात है कि सैनिकों को शादी के लफड़े में किसी मैरिज ब्यूरो के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे बस बायोडाटा दो और लग जाओ सात फेरों की तैयारी में। ये है न मजे वाली बात,
खैर मेरी यह खुशी ज्यादा समय तक कायम नही रह सकी जब में न्यूज़ पेपर की लीड स्टोरी पढी तो मेरी सारी कल्पनाएँ छूमंतर हो गई । लीड स्टोरी में जयपुर के हमलों को नजरंदाज करते हुए पाकिस्तान स बात करने का सही समय करार दिया अभी दो दिनों पहले की ही बात थी की पाकिस्तान के रेंजरों ने शान्ति के माहौल को तोड़ते हुए रात भर बॉर्डर पर बंदूकों से बरात जैसा जसना मनाया था और आज के पेपर में ही ख़बर थी की पाकिस्तानी फायरिंग में एक भारतीय जवान शहीद हो गया है । सीमा पर बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर भारत ने भी सीमा पर कुछ और सैनिकों की तैनाती कर दी थी जो जरूरी भी थी ।
अब जब बॉर्डर पर ऐसा माहौल हो , तो गोलाबारी के सामने शादियों की शहनाइयों के सुर दब से जाते है सभी को बस यही याद आता है हम जियेंगे और मरेंगे ऐ वतन तेरे लिए .............. ।
और सिपाही भी यहीं सोचते होंगे बंसी से बंदूक बनाते हम है प्रेम पुजारी ............ताकत वतन की ........... ।

3 टिप्पणियाँ:

अतुल ने कहा…

वरमाला और जयमाला साथ साथ चले तो क्या हर्ज है. वेरिफ़िकेशन हटाएं.

Udan Tashtari ने कहा…

सही कह रहे हैं.

shashipravah ने कहा…

jindgi ka anand unhe bhi lene ka hak he