भोपाल
व्यंग्य संवेदना की जमीं पर अनुभव के बीजों को कल्पनाशीलता से सींचने के जैसा है ये कहना है जाने-माने आर्थिक विश्लेषक और व्यंग्य कर श्री आलोक पुराणिक जी का , जो इन दिनों पत्रकारिता विभाग के छात्रों से रूबरू हो रहे है इस मसले पर बाकि बातें ब्रेक के बाद ........................................... ।
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